*कला साधक*
*संस्कृति संवाहक*
*आध्यात्मिक सेवा*

शिक्षा एवं परिवार

ज्ञान और संस्कार की नींव
शिक्षा
अथर्व कृष्ण 'बाला' आधुनिक औपचारिक शिक्षा के साथ-साथ प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा से भी जुड़े हुए हैं। वे स्कूल में नियमित पढ़ाई करते हैं और सभी विषयों में अच्छे अंक प्राप्त करते हैं।
औपचारिक शिक्षा
विद्यालय में गणित, विज्ञान, हिंदी, अंग्रेजी जैसे सभी विषयों का अध्ययन। अनुशासन और समयबद्धता के साथ पढ़ाई।
शास्त्रीय भक्ति संगीत
गुरुजी के सानिध्य में राग-रागिनी, ध्रुपद-धमार और भजन गायन का निरंतर अभ्यास। हारमोनियम और तबले की शिक्षा।
वैदिक ज्ञान
वेद, उपनिषद और पुराणों का अध्ययन। संस्कृत श्लोकों का उच्चारण और अर्थ समझना। गीता के श्लोक कंठस्थ।
इस प्रकार आधुनिक और प्राचीन शिक्षा के संगम से अथर्व का व्यक्तित्व आध्यात्मिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध हो रहा है। वे ज्ञान और भक्ति दोनों को साथ लेकर चल रहे हैं।
पारिवारिक पृष्ठभूमि
अथर्व एक प्रतिष्ठित ब्रज सांस्कृतिक परिवार से संबंध रखते हैं। उनका परिवार ब्रज की कला, संस्कृति और भक्ति परंपरा से जुड़ा हुआ है।
पिता: पं. दीपक शर्मा
रासलीला परंपरा के सुप्रसिद्ध कलाकार
- ब्रज की प्राचीन रासलीला कला के संरक्षक
- डिजिटल माध्यमों से ब्रज संस्कृति का प्रचार-प्रसार
- कृष्ण, राम, शिव के स्वरूपों में प्रसिद्ध
- नई पीढ़ी को कला सिखाने में समर्पित
- ब्रज संस्कृति के प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान
ऐसे कलात्मक और आध्यात्मिक वातावरण में पलने-बढ़ने के कारण अथर्व को बचपन से ही भक्ति, संगीत और कला के संस्कार मिले। पिता की प्रेरणा से वे भी इसी मार्ग पर अग्रसर हैं और ब्रज की महान परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
"जिस परिवार में संगीत और भक्ति का वास हो, उस घर के बच्चे स्वयं ही संस्कारवान बन जाते हैं"
साधना एवं दिनचर्या

अनुशासन ही साधना का पहला चरण है
अथर्व कृष्ण 'बाला' का जीवन बाल अवस्था में ही तपस्वी जैसा है। खेल-कूद की उम्र में वे भक्ति, संगीत और साधना के मार्ग पर अडिग चलते हैं। उनकी दिनचर्या देखकर बड़ों को भी प्रेरणा मिलती है कि प्रभु भक्ति के लिए कोई उम्र बाधा नहीं।
ब्रह्म मुहूर्त - योग एवं ध्यान
सूर्योदय से पहले उठकर प्राणायाम, सूर्य नमस्कार और 30 मिनट का मौन ध्यान। ब्रह्म मुहूर्त की ऊर्जा से दिन की शुरुआत होती है।
शास्त्रीय संगीत रियाज़
गुरुजी के सानिध्य में राग भैरव से दिन का आरंभ। हारमोनियम और तबले के साथ 2 घंटे का कठोर अभ्यास। सुर-ताल की साधना।
धार्मिक ग्रंथ अध्ययन
श्रीमद्भागवत, रामायण और भक्तमाल का पाठ। संस्कृत श्लोक कंठस्थ करना और उनके भावार्थ समझना। विद्वानों से सत्संग।
अभिनय एवं लीला अभ्यास
कृष्ण, राम, हनुमान के स्वरूप में प्रवेश की तैयारी। हाव-भाव, संवाद और मुद्राओं का अभ्यास। हर लीला को जीवंत करना।
संध्या भजन अभ्यास
सायंकाल में परिवार संग भजन संध्या। मीरा, सूरदास और रसखान के पदों का गायन। भाव के साथ भजन करना मुख्य साधना।
रात्रि ध्यान एवं शयन
दिन भर की साधना का चिंतन, प्रभु को धन्यवाद और 15 मिनट का रात्रि ध्यान। 9 बजे तक शयन। नियमित 7 घंटे की नींद।
योग साधना
नित्य योग से शरीर स्वस्थ और मन शांत रहता है
संगीत साधना
सुर ही ईश्वर है - इस भाव से रोज़ रियाज़
शास्त्र साधना
ज्ञान बिना भक्ति अधूरी - ग्रंथों का अध्ययन
कला साधना
अभिनय से प्रभु की लीला का साक्षात दर्शन
"जिस बालक की दिनचर्या में खेल से पहले भजन हो, सोने से पहले ध्यान हो - वह बालक नहीं, साक्षात भक्ति का स्वरूप है"
- एक वरिष्ठ संत
















